प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का जो शोर सुनाई दे रहा है वह ठीक नहीं कहा जा सकता क्योंकि आज के दौर में ये देश की आवश्यकता है। यह ज़रूरी है की पैसे के सत्रोत का पता सबको होना चाहिए ऐसा न हो की इसमें कालाधन लगा हो तो घाटा और अधिक होगा। चोरबाजारी और काला धन देश का सबसे बड़ा खतरा है इसे सफ़ेद किये बगैर देश की आर्थिक स्थिति सुधरनी काफी मुश्किल है फिर भी देश में किसानों को बिचोलियों के चंगुल से बचाने के लिए ये ज़रूरी कदम हो सकता है छोटे ग्राहकों को इससे काफी फायदा होगा। किसानों को फायदा, ग्राहकों को फायदा तो लगता है की देश में चोरबाजारी ज़यादा है उनको घाटा ज़रूर होगा। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश कर की चोरी रोकने के लिये भी ये सही कदम साबित हो सकता है। ये अवश्य है की छोटे व्यापारियों को घाटा होगा जो बिचोलियों के हाथों की कठपुतलियां बन कर रह गए है। आवश्यकता इस बात की है की सरकार निवेशकों का पूरा ब्योरा देश को दे ताकि संशय की गुंजाइश न रहे।
Pradeep
रविवार, सितंबर 16, 2012
बुधवार, सितंबर 05, 2012
adhayapak diwas
5 सितंबर हर वर्ष शिक्षकदिवस के रूप में मनाया जाता है सभी शिक्षकों के लिए गर्व की बात है ये इसलिए क्योंकि शिक्षक में अध्भुत प्रतिभा होती है की वह कितनी भी उंचाईयों को छू सकता है और साथ ही साथ किसी को ऊंचे आसन पर बिठा भी सकता है आज का दिन शिक्षा जगत के लिए सम्मान का दिन है सभी शिक्षक बंधुओं को बहुत बधाई आओ इस दिन संकल्प करें की ऐसे योग्य और देशभक्त व अनुशासित भारतीय तैयार करें जो मातृभूमि के सचे सिपाही बनें अपने देश को विशव के ऊंचे सिंघासन पर सुशोभित करें ,देश को भारशाताचारियों ,लोभियों ,देशद्रोहियों से मुक्त करें और देश का पुनरुधार करें
फिर देश में होगी धरम की जय उन्नति का सितारा चमकेगा
प्रताप बढेगा भारत का तिरंगा शान से लहराएगा
आओ मिल कर देश का उधार करें जय शिक्षक जय भारत मां
फिर देश में होगी धरम की जय उन्नति का सितारा चमकेगा
प्रताप बढेगा भारत का तिरंगा शान से लहराएगा
आओ मिल कर देश का उधार करें जय शिक्षक जय भारत मां
बुधवार, अगस्त 29, 2012
KASAB KI FANSI
कसाब को फांसी की सजा हुई अच्छा हुआ , ये होनी ही थी,इस पर विचार करना बहुत ज़रूरी है की ये देश में कैसे आते हैं इस पर सबसे पहले विचार करना होगा होगा .सजा उनको भी मिलनी चाहिए जिनके कारण ये देशद्रोही देश में परवेश कर पाये,भरष्टाचार ही इसका सबसे बड़ा कारण है बगैर देशद्रोहीकी सहायता से ये सभव हो ही नहीं सकता था अतः उनको बेनकाब करने की ज़रुरत है जो ऊँचे पदों पर बैठ कर देश का सौदा करते हैं . उनको चुराहे पर फांसी दे देनी चाहिये या जिंदा ही ज़मीन में दफ़न कर देना चाहिए
बुधवार, अगस्त 01, 2012
शुक्रवार, फ़रवरी 24, 2012
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